
बाँकी मोंगरा क्षेत्र मनाया गया गुरु घासीदास जयंती पर्व क्षेत्र के व्यापारी एवं युवा वर्ग ने मुख्य मार्ग पर प्रसाद वितरण कर जाहिर की खुशियां।
कोरबा जिले के बाँकी मोंगरा थाना क्षेत्र अंतर्गत बाँकी मोंगरा के दो नंबर मुख्य मार्ग पर बाबा गुरु घासीदास जयंती के पर्व पर क्षेत्र के व्यापारी एवं युवा वर्ग के द्वारा प्रसाद वितरण कर खुशियां जाहिर की और बाबा गुरु घासीदास के वचनों पर प्रकाश डाला।

गुरु घासीदास बाबा जी छत्तीसगढ़ के एक महान संत और समाज सुधारक थे।

उन्होंने समाज में व्याप्त अंधविश्वास, छुआछूत और ऊंच-नीच की भावना को मिटाने के लिए ‘सतनाम पंथ’ की स्थापना की। उनके विचार आज भी समाज को सही दिशा दिखाने का कार्य करते हैं।
यहाँ उनके प्रमुख विचारों और उपदेशों का सार दिया गया है:
- “मनखे-मनखे एक समान” (सभी मनुष्य एक समान हैं)
यह गुरु घासीदास जी का सबसे प्रमुख संदेश है। उनका मानना था कि ईश्वर ने सभी इंसानों को एक जैसा बनाया है, इसलिए समाज में जाति, वर्ण या धर्म के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। उन्होंने दलितों और शोषितों को आत्म-सम्मान के साथ जीने की प्रेरणा दी। - सत्य ही ईश्वर है (सतनाम)
उन्होंने ‘सतनाम’ (सत्य का नाम) की आराधना पर जोर दिया। उनके अनुसार, ईश्वर निर्गुण और निराकार है। सत्य के मार्ग पर चलना ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है।
“सत्य से बड़ा कोई धर्म नहीं है और सत्य ही मानव जीवन का आधार है।” - इन्सान सत्य में निवास करता है। उन्होंने लोगों को अंधविश्वास और ढकोसलों से दूर रहने की सलाह दी।
- सात प्रमुख सिद्धांत (सप्त सिद्धांत)
गुरु घासीदास जी ने अपने अनुयायियों के लिए सात नियम बताए थे, जो नैतिक जीवन जीने के लिए आवश्यक हैं:
सतनाम पर विश्वास: केवल एक सत्य ईश्वर (निराकार) पर विश्वास रखना।
जाति-भेद का विरोध: जाति-पाति के भेदभाव को न मानना।
मांस-मदिरा का निषेध: मांस नहीं खाना और शराब या नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करना।
परस्त्री का सम्मान: पराई स्त्री को माता या बहन के समान समझना।
चोरी न करना: मेहनत की कमाई खाना, चोरी से दूर रहना।
जीव हत्या निषेध: किसी भी जीव को कष्ट न देना और हिंसा न करना। - अहिंसा और करुणा
उन्होंने ‘जीव दया’ पर बहुत जोर दिया। उनका कहना था कि जानवरों के प्रति भी दया का भाव रखना चाहिए।
दोपहर में हल न चलाना: उन्होंने किसानों को दोपहर (तेज धूप) में बैलों से हल न चलवाने का संदेश दिया ताकि पशुओं को आराम मिल सके। यह उनकी अपार करुणा का प्रतीक है। - नशामुक्ति और सादा जीवन
उन्होंने समाज को नशा मुक्त बनाने का प्रयास किया। उनका मानना था कि नशा इंसान की बुद्धि और घर-परिवार को नष्ट कर देता है। उन्होंने सादा जीवन और उच्च विचार अपनाने की प्रेरणा दी।
सारांश
गुरु घासीदास जी के विचार केवल धार्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक क्रांति के विचार थे। उन्होंने उस समय समानता की बात की जब समाज घोर जातिवाद में जकड़ा हुआ था। उनका ‘जैतखाम’ (श्वेत ध्वज) सत्य, शांति और सादगी का प्रतीक है।



















